सीकर जिले में एक पुलिस कांस्टेबल (Constable) ने जातिसूचक शब्दों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली है और यह आरोप उसके सहकर्मियों पर है। कांस्टेबल लक्ष्मीकांत ने शनिवार देर रात को कमरे में फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली। देर रात करीब साढ़े तीन बजे घटना का पता चलने पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। मौका मुआयना कर शव को नीचे उतारा।
इस घटना के बाद कांस्टेबल (Constable) के व्हाट्सएप पर एक सुसाइड नोट मिलने की जानकारी सामने आई। जिसमें मौत से पहले कांस्टेबल लक्ष्मीकांत ने लिखते हुए आरोप लगाया कि वह पूजा पूनियां व समस्त स्टॉफ से परेशान होकर सुसाइड को मजबूर हो रहा है।
दैनिक भास्कर की एक खबर के अनुसार “10 सितंबर को जब वह महिला थाने में ड्यूटी पर गया तब से चालक मुकेश की वजह से समस्त एक होकर जातिवाद को लेकर मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। वह शनिवार, 14 सितंबर को महिला थाना में ड्यूटी करके आया तब कांस्टेबल शिव दयाल व हैडकांस्टेबल झाबरमल ने उसे जातिसूचक शब्द कहे और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इससे मजबूरन वह आत्महत्या कर रहा है।
पता चला है कि कांस्टेबल लक्ष्मीकांत सीकर जिले में लक्ष्मणगढ़ कस्बे के सिंगोदड़ा गांव का रहने वाला था। लक्ष्मीकांत उद्योग नगर थाना क्षेत्र के राधाकिशनपुरा में कमरा किराए पर लेकर रहता था। लक्ष्मीकांत के खुदकुशी की घटना ने तूल पकड़ लिया। पूर्व विधायक पेमाराम, भीम सेना के पदाधिकारी, सागर खाचरियावास सहित कई लोग अस्पताल की मोर्चरी पर पहुंचे।
वहीं, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। परिजनों ने कांस्टेबल लक्ष्मीकांत के शव का पोस्टमार्टम करवाने से इंकार कर दिया। इस बीच सूचना पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने जनप्रतिनिधियों और कांस्टेबल के परिजनों से बातचीत की। समझाइश का प्रयास किया। लेकिन बात नहीं बनी।
एक महिला पुलिसकर्मी पर यह संगीन आरोप है कि उसने जातिसूचक शब्दों को बढ़ावा दिया तथा तथा एक दलित सहकर्मी के साथ भेदभाव किया उसके बाद बाकि सभी स्टाफ के लोगों ने भी इस जुर्म में उसका साथ दिया परन्तु पुलिस विभाग की इस तरह की हरकत से पता चलता है की यदि कोई आम SC/St का केस लिखवाने जाये तो उसके साथ कैसा व्यवहार होगा।














