इतिहास में बहुत से पुरुष योद्धा हुए और बहुत सी महिला योद्धा, भारतीय इतिहास इतना गहरा दबा हुआ है जहाँ तक हम शायद ही पहुँच पायें, हमारे देश का इतिहास वीरों और योद्धाओं की गाथाओं से भरा पड़ा है, हमारी कोशिश यही रहती है कि हम आपको इतिहास के दबे पन्नों से हर एक दबे योद्धाओं से रूबरू करवायें, आज के आर्टिकल में हम बात करेंगे ताराबाई (Tarabai) भोसले की. जो कि छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji) और छत्रपति संभाजी महाराज दोनों के शासनकाल के दौरान सेनापति रही और मुगलो के साथ कई युद्ध लड़े.
ताराबाई का जन्म (birth of tarabai)
ताराबाई (Tarabai) भोसले का जन्म अप्रैल 1675 में महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पिता हम्बीराव मोहिते मराठा साम्राज्य के प्रमुख सेनापति थे, जिन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji) और छत्रपति संभाजी महाराज दोनों के शासनकाल के दौरान सेनापति बनने का अवसर मिला था। ताराबाई (Tarabai) की एक चाची सोयराबाई थीं, जिनका विवाह छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji) से हुआ था। उनकी मौसी का राजाराम नाम का एक पुत्र था।

हम्बीराव ने अपनी बेटी ताराबाई (Tarabai) का विवाह शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji) के पुत्र राजाराम से किया, जो उनका भतीजा था। यानी मामा ने अपनी बेटी की शादी अपने भतीजे से कर दी। ताराबाई और राजाराम भोसले के पुत्र का नाम शिवाजी द्वितीय रखा गया, जो राजाराम की मृत्यु के बाद मराठा साम्राज्य के सिंहासन पर विराजमान थे।
नाम | ताराबाई (Tarabai) |
जन्म | अप्रैल 1675, महाराष्ट्र, भारत |
पिता | हंबीरराव मोहिते |
पति | छत्रपति राजाराम प्रथम |
पुत्र | शिवाजी द्वितीय |
पोता | राजाराम द्वितीय |
ज्येष्ठ | छत्रपति संभाजी महाराज |
भतिजा | छत्रपति शाहू महाराज |
भुआ | सोयराबाई |
सास | सोयराबाई |
धर्म | हिन्दू |
वंश | मराठा |
प्रसिद्धि | छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji) के पुत्र राजाराम की एक पत्नी |
मृत्यु | 1761, सतारा, महाराष्ट्र (भारत) |
जीवनकाल | 85-86 वर्ष |
आठ साल की उम्र में हुआ विवाह (married at the age of eight)
रानी ताराबाई (Tarabai) का जन्म 1675 में हुआ था. उनके पिता का नाम हबीर राव मोहित था, जो मराठा सेना के मुख्य सेनापति थे. उनकी प्रसिद्धी दूर-दूर तक थी. The History and Culture की रिपोर्ट के अनुसार पिता के सेनापति होने की वजह से उन्होंने अपनी बेटी के लिए कभी भी किसी चीज़ की कोई कमी नहीं रखी. तारा ने शुरू से ही बेहद स्वतंत्र रूप से अपना जीवन जिया था. वह तलवार से लड़ने, तीरंदाजी, घुड़सवारी, सैन्य रणनीति और कूटनीति अन्य सभी विषयों में अच्छी तरह से प्रशिक्षित थीं.
तारा को छत्रपति शिवाजी (Chhatrapati Shivaji) ने अपनी बहु के रूप में चुना लिया. वो महज़ आठ साल की ही थीं, जब उनका विवाह शिवाजी के बेटे राजाराम से हो गया. बताते चलें, राजाराम शिवाजी और उनकी दूसरी पत्नी सोयराबाई से हुई संतान थे. ताराबाई (Tarabai) ने अपने जीवन काल में मराठों के उदय और पतन को देखा था. जिस समय उनकी शादी हुई तब वह एक ऐसा समय था, जब मुगलों और मराठों के बीच लगातार दक्कन पर नियंत्रण के लिए युद्ध चल रहा था. इसी क्रम में साल 1674 में, शिवाजी को उनके द्वारा स्थापित स्वतंत्र मराठा साम्राज्य के शासक का ताज पहनाया गया. जिन्होंने मुगलों के वर्चस्व को चुनौती दी थी.
औरंगज़ेब का कब्ज़ा (Aurangzeb’s capture)
औरंगज़ेब ने मराठों के कई दुर्गों पर अधिकार कर लिया था | उनमें से सिंह गढ़,पूना और पुरन्दन तीनों किलो पर ताराबाई ने पुनः अपना अधिकार स्थापित कर पूरे महाराष्ट्र में अपनी वीरता की धाक जमा दी थी | एक और जहाँ उसके विश्वासपात्र सहयोगियों और शुभाकांक्षियों को ताराबाई (Tarabai) की सफलता पर हर्ष और गर्व था, वहीँ शाहू और उसके द्वारा समर्पित लोग ताराबाई (Tarabai) के विरुद्ध विभिन्न तरह के षड्यंत्र रचकर उसके कार्य में बाधक बन रहे थे | वीर ताराबाई ने सबका द्रढ़ता और साहस से मुकाबला किया और विश्वासघातियों व षड्यंत्रकारियों के सारे इरादों को विफल कर दिया |
शाहू की मृत्यु के बाद ताराबाई (Tarabai) का पौत्र राम राज गद्दी पर बैठा | इस समय बालाजी पेशवा पुना पर अधिकार कर पूरी राज्य सत्ता हड़पने को उत्सुक था | उसने रामराज को कैद कर दिया | इस समय ताराबाई (Tarabai) की अवस्था 70 साल की थी पर साहस भी कम न था उसने पेशवा को परास्त करके पुना पर आक्रमण किया,वह डर कर भाग गया और ताराबाई (Tarabai) ने पुना पर आधिपत्य स्थापित किया वह अपने पौत्र राम राज को कैद से छुड़वाया |
पानीपत का युद्ध (battle of panipat)
पानीपत युद्ध 1761 में हुआ और इसमें ताराबाई (Tarabai) के इस युद्ध में 2 लाख मराठों की मृत्यु हो गई| और मराठो कि हार होने के बाद 1761 बालाजी बाजीराव की मृत्यु हो गई.
रानी ताराबाई मोहिते की मृत्यु और समाधि (Death and Samadhi of Rani Tarabai Mohite)
राजा राम की मृत्यु के पश्चात मराठा साम्राज्य की संरक्षिका बनकर अगर महारानी ताराबाई (Tarabai) ने मुगलों से इस साम्राज्य को नहीं बचाया होता तो आज इतिहास कुछ और ही होता। 9 दिसंबर 1761 का दिन था, 86 वर्ष की उम्र में महारानी ताराबाई ने देह त्याग दी। महारानी ताराबाई जयंती maharani tarabai jaynti 14 अप्रैल को प्रतिवर्ष बहुत ही धूमधाम के साथ मनाई जाती है और इस वीरांगना को याद किया जाता है।
पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए बहुत बहुत सुक्रिया हम आशा करते है कि आज के आर्टिकल महारानी ताराबाई (Tarabai) से आपको जरूर कुछ सीखने को मिला होगा, अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो तो इसे शेयर करना ना भूले और ऐसे ही अपना प्यार और सपोर्ट बनाये रखे THEHALFWORLD वेबसाइट के साथ चलिए मिलते है नेक्स्ट आर्टिकल में तब तक के लिए अलविदा, धन्यवाद !
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